न पापे प्रतिपाप: स्यात् साधुरेव सदा भवेत्।
आत्मनैव हत: पापो य: पापं कर्तुमिच्छति॥ ४५॥
अनुवाद
यदि कोई तुम्हारे साथ बुरा व्यवहार करे, तो तुम्हें भी उसके साथ बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए । सबके साथ सदैव अच्छा व्यवहार करना चाहिए । जो पापी दूसरों को हानि पहुँचाना चाहता है, उसका स्वयं ही नाश हो जाता है ॥ 45॥
If someone misbehaves with you, you should not misbehave with him in return. Always behave well with everyone. The sinner who wants to harm others gets destroyed on his own. ॥ 45॥