Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.207.20: शिकारी बोला - "ब्राह्मण! यह कार्य मेरे पूर्वजों के समय से चला आ रहा है। मैंने भी अपने कुल के अनुकूल ही वृत्ति अपनाई है। मैं केवल अपने धर्म का पालन कर रहा हूँ, अतः आप मुझ पर क्रोध न करें।"   |   mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.207.20 
व्याध उवाच
कुलोचितमिदं कर्म पितृपैतामहं परम्।
वर्तमानस्य मे धर्मे स्वे मन्युं मा कृथा द्विज॥ २०॥
 
 
अनुवाद
शिकारी बोला - "ब्राह्मण! यह कार्य मेरे पूर्वजों के समय से चला आ रहा है। मैंने भी अपने कुल के अनुकूल ही वृत्ति अपनाई है। मैं केवल अपने धर्म का पालन कर रहा हूँ, अतः आप मुझ पर क्रोध न करें।"
 
The hunter said - Brahman! This work has been going on since the time of my forefathers. I have also adopted the profession that is appropriate for my clan. I am only following my dharma; hence please do not be angry with me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)