Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.18: शिकारी का घर बहुत सुन्दर था। वहाँ पहुँचकर शिकारी ने ब्राह्मण को बैठने के लिए आसन दिया, उसे जल से अर्घ्य दिया और बड़े आदर के साथ उस श्रेष्ठ ब्राह्मण का पूजन किया। | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रविश्य च गृहं रम्यमासनेनाभिपूजित:।
अर्घ्येण च स वै तेन व्याधेन द्विजसत्तम:॥ १८॥
अनुवाद
शिकारी का घर बहुत सुन्दर था। वहाँ पहुँचकर शिकारी ने ब्राह्मण को बैठने के लिए आसन दिया, उसे जल से अर्घ्य दिया और बड़े आदर के साथ उस श्रेष्ठ ब्राह्मण का पूजन किया।
The hunter's house was very beautiful. On reaching there the hunter gave the Brahmin a seat to sit and offered Arghya (water offering) to him and worshipped the great Brahmin with great respect. 18.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥