vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन
»
श्लोक 12
श्लोक
3.207.12
स तु ज्ञात्वा द्विजं प्राप्तं सहसा सम्भ्रमोत्थित:।
आजगाम यतो विप्र: स्थित एकान्तदर्शने॥ १२॥
अनुवाद
ब्राह्मण को आया जानकर शिकारी सहसा तेजी से उठा और एकांत स्थान पर उस स्थान पर आया जहाँ ब्राह्मण खड़ा था।
Knowing that the Brahmin had come, the hunter suddenly got up quickly and came to the place where the Brahmin was standing in a secluded place. 12.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas