Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.205.3-4: हे प्रभु! श्रेष्ठ ब्रह्मर्षे! इस लोक में सूर्य, चन्द्रमा, वायु, पृथ्वी, अग्नि, पिता, माता और गुरु- ये प्रत्यक्ष देवता प्रत्यक्ष हैं। भृगुनन्दन! इनके अतिरिक्त देवरूप में प्रतिष्ठित अन्य देवता भी प्रत्यक्ष देवताओं की श्रेणी में हैं। 3-4॥ | mahabharat अध्याय 3.205: पतिव्रता स्त्री तथा पिता-माताकी सेवाका माहात्म्य । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रत्यक्षमिह विप्रर्षे देवा दृश्यन्ति सत्तम।
सूर्याचन्द्रमसौ वायु: पृथिवी वह्निरेव च॥ ३॥
पिता माता च भगवन् गुरुरेव च सत्तम।
यच्चान्यद् देवविहितं तच्चापि भृगुनन्दन॥ ४॥
अनुवाद
हे प्रभु! श्रेष्ठ ब्रह्मर्षे! इस लोक में सूर्य, चन्द्रमा, वायु, पृथ्वी, अग्नि, पिता, माता और गुरु- ये प्रत्यक्ष देवता प्रत्यक्ष हैं। भृगुनन्दन! इनके अतिरिक्त देवरूप में प्रतिष्ठित अन्य देवता भी प्रत्यक्ष देवताओं की श्रेणी में हैं। 3-4॥
Lord! Best Brahmarshe! In this world, Sun, Moon, Air, Earth, Fire, Father, Mother and Guru – these direct gods are visible. Bhrigunandan! Apart from this, the other deities established in the form of gods are also in the category of direct gods. 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥