एवं स निहतस्तेन कुवलाश्वेन सत्तम॥ ४१॥
धुन्धुर्नाम महादैत्यो मधुकैटभयो: सुत:।
कुवलाश्वश्च नृपतिर्धुन्धुमार इति स्मृत:॥ ४२॥
अनुवाद
सज्जनो! इस प्रकार मधुकैटभ कुमार महान् राक्षस धुंधु कुवलाश्व के द्वारा मारा गया और राजा कुवलाश्व धुंधुमार नाम से प्रसिद्ध हुआ ॥41-42॥
Gentleman! In this way Madhukaitbha Kumar was killed by the great demon Dhundhu Kuvalashva and King Kuvalashva became famous by the name of Dhundhumar. 41-42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥