श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  3.204.41-42 
एवं स निहतस्तेन कुवलाश्वेन सत्तम॥ ४१॥
धुन्धुर्नाम महादैत्यो मधुकैटभयो: सुत:।
कुवलाश्वश्च नृपतिर्धुन्धुमार इति स्मृत:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
सज्जनो! इस प्रकार मधुकैटभ कुमार महान् राक्षस धुंधु कुवलाश्व के द्वारा मारा गया और राजा कुवलाश्व धुंधुमार नाम से प्रसिद्ध हुआ ॥41-42॥
 
Gentleman! In this way Madhukaitbha Kumar was killed by the great demon Dhundhu Kuvalashva and King Kuvalashva became famous by the name of Dhundhumar. 41-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)