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mahabharat 3.204.4: तब ब्रह्मा ने उससे कहा, "ऐसा ही होगा। जाओ।" यह सुनकर धुंधू ने सिर झुकाया, उनके चरण छुए और वहाँ से चला गया।   |   mahabharat अध्याय 3.204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.204.4 
एवं भवतु गच्छेति तमुवाच पितामह:।
स एवमुक्तस्तत्पादौ मूर्ध्ना स्पृश्य जगाम ह॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब ब्रह्मा ने उससे कहा, "ऐसा ही होगा। जाओ।" यह सुनकर धुंधू ने सिर झुकाया, उनके चरण छुए और वहाँ से चला गया।
 
Then Brahma said to him, "It will be so. Go." On hearing this Dhundhu bowed his head, touched his feet and went away from there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)