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mahabharat 3.204.34-35: तत्पश्चात् महर्षियोंसहित समस्त देवता प्रसन्नतापूर्वक वहाँ आये और राजा से वर माँगने की प्रार्थना करने लगे। हे राजन! उनकी बातें सुनकर कुवलाश्व अत्यन्त प्रसन्न हुए और हाथ जोड़कर तथा सिर झुकाकर इस प्रकार बोले -॥34-35॥   |   mahabharat अध्याय 3.204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  3.204.34-35 
प्रीतैश्च त्रिदशै: सर्वैर्महर्षिसहितैस्तदा॥ ३४॥
वरं वृणीष्वेत्युक्त: स प्राञ्जलि: प्रणतस्तदा।
अतीव मुदितो राजन्निदं वचनमब्रवीत्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महर्षियोंसहित समस्त देवता प्रसन्नतापूर्वक वहाँ आये और राजा से वर माँगने की प्रार्थना करने लगे। हे राजन! उनकी बातें सुनकर कुवलाश्व अत्यन्त प्रसन्न हुए और हाथ जोड़कर तथा सिर झुकाकर इस प्रकार बोले -॥34-35॥
 
Thereafter all the gods including the great sages came there happily and started requesting the king to ask for a boon. O King! On hearing their words Kuvalashva became very happy and with folded hands and bowed head spoke thus -॥ 34-35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)