Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.204.26: तत्पश्चात् उसने प्रलयकाल की अग्नि के समान अपने मुख से अग्नि की चिनगारियाँ उगलनी आरम्भ कीं और अपने तेज से उन समस्त राजकुमारों को जलाकर भस्म कर दिया॥26॥   |   mahabharat अध्याय 3.204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.204.26 
आस्याद् वमन् पावकं स संवर्तकसमं तदा।
तान् सर्वान्नृपते: पुत्रानदहत् स्वेन तेजसा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने प्रलयकाल की अग्नि के समान अपने मुख से अग्नि की चिनगारियाँ उगलनी आरम्भ कीं और अपने तेज से उन समस्त राजकुमारों को जलाकर भस्म कर दिया॥26॥
 
After that he started spewing sparks of fire from his mouth like the fire of Doomsday and burnt all those princes to ashes with his brilliance. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)