Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.204.2: वह बहुत समय तक एक पैर पर खड़ा रहा। उसका शरीर इतना दुर्बल हो गया कि नाड़ियों और रक्त वाहिकाओं का जाल दिखाई देने लगा। ब्रह्माजी उसकी तपस्या से प्रसन्न हुए और उसे वरदान दिया। धुंधू ने ब्रह्माजी से इस प्रकार वर माँगा-॥2॥   |   mahabharat अध्याय 3.204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.204.2 
अतिष्ठदेकपादेन कृशो धमनिसंतत:।
तस्मै ब्रह्मा ददौ प्रीतो वरं वव्रे स च प्रभुम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
वह बहुत समय तक एक पैर पर खड़ा रहा। उसका शरीर इतना दुर्बल हो गया कि नाड़ियों और रक्त वाहिकाओं का जाल दिखाई देने लगा। ब्रह्माजी उसकी तपस्या से प्रसन्न हुए और उसे वरदान दिया। धुंधू ने ब्रह्माजी से इस प्रकार वर माँगा-॥2॥
 
He stood on one leg for a long time. His body became so weak that a network of nerves and blood vessels became visible. Brahmaji was pleased with his penance and granted him a boon. Dhundhu asked for a boon from Lord Brahma in this manner-॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)