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mahabharat 3.204.17: युधिष्ठिर! जहाँ महादैत्य धुन्धु रहता था, वहाँ आकाश में देवताओं आदि के विमान दिखाई देने लगे।   |   mahabharat अध्याय 3.204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.204.17 
अन्तरिक्षे विमानादि देवतानां युधिष्ठिर।
तत्रैव समदृश्यन्त धुन्धुर्यत्र महासुर:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जहाँ महादैत्य धुन्धु रहता था, वहाँ आकाश में देवताओं आदि के विमान दिखाई देने लगे।
 
Yudhisthira! Where the great demon 'Dhundhu' lived, planes of gods etc. started appearing in the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)