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mahabharat 3.204.13: तत्पश्चात् उत्तंक की प्रार्थना पर सम्पूर्ण जगत् का कल्याण करने के लिए सर्वशक्तिमान भगवान विष्णु ने अपने तेजस्वी रूप से कुवलाश्व में प्रवेश किया॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.204.13 
तमाविशत् ततो विष्णुर्भगवांस्तेजसा प्रभु:।
उत्तङ्कस्य नियोगेन लोकानां हितकाम्यया॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उत्तंक की प्रार्थना पर सम्पूर्ण जगत् का कल्याण करने के लिए सर्वशक्तिमान भगवान विष्णु ने अपने तेजस्वी रूप से कुवलाश्व में प्रवेश किया॥13॥
 
Thereafter, on the request of Uttanka, to benefit the entire world, the almighty Lord Vishnu entered Kuvalashva in his glorious form. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)