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mahabharat 3.204.12: शत्रुमर्दन महाराज कुवलाश्व अपने इक्कीस हजार बलवान पुत्रों के साथ (अपनी सेना सहित) चले गए थे॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.204.12 
सहस्रैरेकविंशत्या पुत्राणामरिमर्दन:।
कुवलाश्वो नरपतिरन्वितो बलशालिनाम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुमर्दन महाराज कुवलाश्व अपने इक्कीस हजार बलवान पुत्रों के साथ (अपनी सेना सहित) चले गए थे॥12॥
 
Shatrumardan Maharaj Kuvalashva had gone with his twenty one thousand strong sons (along with his army). 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)