Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.204.1: मार्कण्डेयजी कहते हैं - महाराज ! मधु और कैटभ इन दोनों का पुत्र धुन्धु है, जो अत्यन्त तेजस्वी, बल और पराक्रम से संपन्न है। उसने घोर तपस्या की थी ॥1॥ | mahabharat अध्याय 3.204: धुन्धुकी तपस्या और वरप्राप्ति, कुवलाश्वद्वारा धुन्धुका वध और देवताओंका कुवलाश्वको वर देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मार्कण्डेय उवाच
धुन्धुर्नाम महाराज तयो: पुत्रो महाद्युति:।
स तपोऽतप्यत महन्महावीर्यपराक्रम:॥ १॥
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं - महाराज ! मधु और कैटभ इन दोनों का पुत्र धुन्धु है, जो अत्यन्त तेजस्वी, बल और पराक्रम से संपन्न है। उसने घोर तपस्या की थी ॥1॥
Markandeyji says- Maharaj! The son of those two Madhu and Kaitabha is Dhundhu who is very brilliant and blessed with great strength and valour. He performed great penance. ॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥