श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.202.31 
न हि धुन्धुर्महातेजास्तेजसाल्पेन शक्यते।
निर्दग्धुं पृथिवीपाल स हि वर्षशतैरपि॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
राजा ! धुंधु बड़ा बलवान राक्षस है। उसे कोई भी साधारण शक्ति से सौ वर्षों में भी नष्ट नहीं कर सकता ॥31॥
 
King! Dhundhu is a very powerful demon. No one can destroy him even in a hundred years with ordinary power. ॥ 31॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि धुन्धुमारोपाख्याने द्वॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २०२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें धुन्धुमारोपाख्यानविषयक

दो सौ दोवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०२॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)