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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह
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श्लोक 3
श्लोक
3.202.3
विष्वगश्व: पृथो: पुत्रस्तस्मादद्रिश्च जज्ञिवान्।
अद्रेश्च युवनाश्वस्तु श्रावस्तस्यात्मजोऽभवत्॥ ३॥
अनुवाद
पृथुका के पुत्र विश्वागश्व हुए और उनके पुत्र का नाम अद्रि था। अद्रि के पुत्र का नाम युवनाश्व था। युवनाश्व का पुत्र श्रवा नाम से प्रसिद्ध हुआ ॥3॥
Prithuka became Vishwagashwa and his son was Adri. Adrik's son's name was Yuvnashwa. Yuvanashva's son became famous by the name Shrava. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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