श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  3.202.24-25 
यदा तदा भूश्चलति सशैलवनकानना।
तस्य नि:श्वासवातेन रज उद्‍धूयते महत्॥ २४॥
आदित्यपथमाश्रित्य सप्ताहं भूमिकम्पनम्।
सविस्फुलिङ्गं सज्वालं धूममिश्रं सुदारुणम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब वह साँस लेता है, तब पर्वत, वन और जंगल सहित सारी पृथ्वी हिलने लगती है। उसके साँस के तूफान से इतनी ऊँची धूल भरी आँधी उठती है कि वह सूर्य का मार्ग भी ढक लेती है और वहाँ सात दिनों तक भूकम्प आते रहते हैं। अग्नि की चिंगारियाँ, लपटें और धुआँ उठकर अत्यन्त भयानक दृश्य प्रस्तुत करते हैं॥24-25॥
 
When he breathes, the entire earth including mountains, forests and jungles starts shaking. The storm of his breath creates such a high dust storm that it even covers the path of the sun and earthquakes keep happening there for seven days. Sparks of fire, flames and smoke arise and present a very terrifying scene.॥24-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)