श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.202.11 
उत्तङ्क उवाच
भवता रक्षणं कार्यं तत् तावत् कर्तुमर्हसि।
निरुद्विग्ना वयं राजंस्त्वत्प्रसादाद् भवेमहि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उत्तंक ने कहा—हे राजन! प्रजा की रक्षा करना आपका कर्तव्य है। अतः आप पहले वही करें, जिससे आपकी कृपा से हम निर्भय हो जाएँ॥ 11॥
 
Uttanka said—O King! It is your duty to protect the people. Therefore, you should first do that so that we become fearless by your grace.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)