श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.202.1 
मार्कण्डेय उवाच
इक्ष्वाकौ संस्थिते राजन् शशाद: पृथिवीमिमाम्।
प्राप्त: परमधर्मात्मा सोऽयोध्यायां नृपोऽभवत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं - राजन ! राजा इक्ष्वाकु के मरने के बाद उनके परम धर्मात्मा पुत्र शशाद इस पृथ्वी पर राज्य करने लगे। वे अयोध्या में रहते थे।
 
Markandeyaji says – Rajan! After the death of King Ikshvaku, his most pious son Shashad started ruling this earth. He lived in Ayodhya. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)