Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.201.28-29: हे प्रभु! कमलनेत्र! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो मेरी बुद्धि सदैव धर्म, सत्य और इन्द्रिय-संयम में ही लगी रहे। हे प्रभु! आपकी भक्ति का मेरा अभ्यास सदैव बना रहे॥ 28-29॥ | mahabharat अध्याय 3.201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि मे भगवन् प्रीत: पुण्डरीकनिभेक्षण॥ २८॥
धर्मे सत्ये दमे चैव बुद्धिर्भवतु मे सदा।
अभ्यासश्च भवेद् भक्त्या त्वयि नित्यं ममेश्वर॥ २९॥
अनुवाद
हे प्रभु! कमलनेत्र! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो मेरी बुद्धि सदैव धर्म, सत्य और इन्द्रिय-संयम में ही लगी रहे। हे प्रभु! आपकी भक्ति का मेरा अभ्यास सदैव बना रहे॥ 28-29॥
Lord! Lotus-eyed! If you are pleased with me, then may my intellect always remain focused on Dharma, truth and control of senses. My Lord! May my practice of worshipping you always remain'॥ 28-29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥