Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.201.13: उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान उसके समक्ष प्रकट हुए। उनके दर्शन पाते ही महर्षि ने नम्रतापूर्वक प्रणाम किया और नाना प्रकार के स्तोत्रों से उनकी स्तुति करने लगे। 13॥   |   mahabharat अध्याय 3.201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.201.13 
तस्य प्रीत: स भगवान् साक्षाद् दर्शनमेयिवान्।
दृष्ट्वैव चर्षि: प्रह्वस्तं तुष्टाव विविधै: स्तवै:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान उसके समक्ष प्रकट हुए। उनके दर्शन पाते ही महर्षि ने नम्रतापूर्वक प्रणाम किया और नाना प्रकार के स्तोत्रों से उनकी स्तुति करने लगे। 13॥
 
Pleased with his penance, God appeared before him. As soon as Maharishi got his darshan, he bowed down humbly and started praising him with various hymns. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)