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mahabharat 3.201.10: महाराज! इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्व किस प्रकार धुंधुमार नाम से प्रसिद्ध हुए, यह सुनिए॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 201: उत्तङ्ककी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान‍्का उन्हें वरदान देना तथा इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्वका धुन्धुमार नाम पड़नेका कारण बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.201.10 
यथा स राजा इक्ष्वाकु: कुवलाश्वो महीपति:।
धुन्धुमारत्वमगमत् तच्छृणुष्व महीपते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इक्ष्वाकुवंशी राजा कुवलाश्व किस प्रकार धुंधुमार नाम से प्रसिद्ध हुए, यह सुनिए॥10॥
 
Maharaj! Listen to how King Kuvalashva of the Ikshvaku dynasty became famous by the name of Dhundhumar. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)