श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 20: श्रीकृष्ण और शाल्वका भीषण युद्ध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.20.21 
सैनिकान् मम सूतं च हयांश्च समवाकिरत्।
अचिन्तयन्तस्तु शरान् वयं युध्याम भारत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उसने मेरे सारथि, घोड़ों और सैनिकों पर भी बाणों की वर्षा की। हे भारत! मैंने उसके बाणों की वर्षा की परवाह न की और युद्ध में लगा रहा।
 
He also showered arrows on my charioteer, horses and soldiers. O Bhaarat! I did not care about the shower of his arrows and continued in the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)