श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 20: श्रीकृष्ण और शाल्वका भीषण युद्ध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.20.17 
तत: सागरमासाद्य कुक्षौ तस्य महोर्मिण:।
समुद्रनाभ्यां शाल्वोऽभूत् सौभमास्थाय शत्रुहन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
शत्रुनाश! फिर समुद्र के निकट पहुँचकर और उत्ताल तरंगों से युक्त समुद्र के शिखा के नीचे उसके नाभिदेश (एक द्वीप) में जाकर राजा शाल्व सौभविमान पर स्थित हो गए ॥17॥
 
Enemy destruction! Then after reaching near the sea and going to its Nabhidesh (an island) under the tuft of the ocean with surging waves, King Shalva was stationed on Saubhaviman. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)