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mahabharat 3.2.22: 'रोग, अप्रिय घटनाएँ, अत्यधिक कार्य और प्रिय वस्तुओं से वियोग - इन चार कारणों से शारीरिक दुःख होता है ॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 3.2: धनके दोष, अतिथिसत्कारकी महत्ता तथा कल्याणके उपायोंके विषयमें धर्मराज युधिष्ठिरसे ब्राह्मणों तथा शौनकजीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 2: धनके दोष, अतिथिसत्कारकी महत्ता तथा कल्याणके उपायोंके विषयमें धर्मराज युधिष्ठिरसे ब्राह्मणों तथा शौनकजीकी बातचीत  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.2.22 
व्याधेरनिष्टसंस्पर्शाच्छ्रमादिष्टविवर्जनात्।
दु:खं चतुर्भि: शारीरं कारणै: सम्प्रवर्तते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'रोग, अप्रिय घटनाएँ, अत्यधिक कार्य और प्रिय वस्तुओं से वियोग - इन चार कारणों से शारीरिक दुःख होता है ॥ 22॥
 
'Disease, unpleasant events, excessive work and separation from beloved things - these four causes result in physical suffering. ॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)