Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.2.18: 'राजन्! योग के आठ अंग - यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि, जो उत्तम बुद्धि कही गई है, जो समस्त दुर्गुणों का नाश करने वाली है तथा श्रुति और स्मृति के स्वाध्याय से अच्छी तरह पुष्ट होती है, वह आपमें विद्यमान है। 18॥ | mahabharat अध्याय 3.2: धनके दोष, अतिथिसत्कारकी महत्ता तथा कल्याणके उपायोंके विषयमें धर्मराज युधिष्ठिरसे ब्राह्मणों तथा शौनकजीकी बातचीत । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'राजन्! योग के आठ अंग - यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि, जो उत्तम बुद्धि कही गई है, जो समस्त दुर्गुणों का नाश करने वाली है तथा श्रुति और स्मृति के स्वाध्याय से अच्छी तरह पुष्ट होती है, वह आपमें विद्यमान है। 18॥
'King! The eight parts of Yoga - Yama, Niyama, Asana, Pranayama, Pratyahara, Dharana, Dhyana and Samadhi, which has been said to be the best intelligence which destroys all the ill-effects and is well strengthened by self-study of Shruti and Smriti, is present in you. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥