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mahabharat 3.193.25-26h: संसार में यह विपरीत स्थिति बहुत देखने को मिलती है। अज्ञानी मूर्ख लोग आनंद मना रहे हैं और ज्ञानी लोग दुःख भोग रहे हैं। यहाँ मनुष्य योनि में तो केवल दुःख और पीड़ा ही दिखाई देती है।   |   mahabharat अध्याय 3.193: इन्द्र और बक मुनिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 193: इन्द्र और बक मुनिका संवाद  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  3.193.25-26h 
लोके वैधर्म्यमेतत् तु दृश्यते बहुविस्तरम्।
हीनज्ञानाश्च हृष्यन्ते क्लिश्यन्ते प्राज्ञकोविदा:॥ २५॥
बहुदु:खपरिक्लेशं मानुष्यमिह दृश्यते।
 
 
अनुवाद
संसार में यह विपरीत स्थिति बहुत देखने को मिलती है। अज्ञानी मूर्ख लोग आनंद मना रहे हैं और ज्ञानी लोग दुःख भोग रहे हैं। यहाँ मनुष्य योनि में तो केवल दुःख और पीड़ा ही दिखाई देती है।
 
This opposite condition is seen a lot in the world. Foolish people without knowledge are enjoying themselves while the wise people are suffering. Here in the human form, only pain and suffering are visible. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)