vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 193: इन्द्र और बक मुनिका संवाद
»
श्लोक 17
श्लोक
3.193.17
शतं वर्षसहस्राणि मुने जातस्य तेऽनघ।
समाख्याहि मम ब्रह्मन् किं दु:खं चिरजीविनाम्॥ १७॥
अनुवाद
मैं निर्दोष हूँ! आपकी आयु एक लाख वर्ष की हो गयी है। हे ब्रह्मन्! अपने अनुभव के आधार पर बताइये कि दीर्घायु मनुष्यों को कौन-से दुःख होते हैं?
I am innocent! Your age has reached one lakh years. Brahman! On the basis of your experience, tell us what sorrows the long-lived people experience?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×