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mahabharat 3.192.65: राजा ने कहा, "हे इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रियों! अब मैं वही कर रहा हूँ जो तुम्हें अच्छा लगता है। आज मैं इस ब्राह्मण को कुचलकर मार डालूँगा। एक और शक्तिशाली बाण लाओ और आज मेरा पराक्रम देखो।"   |   mahabharat अध्याय 3.192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.192.65 
राजोवाच
इक्ष्वाकवो हन्त चरामि व: प्रियं
निहन्मीमं विप्रमद्य प्रमथ्य।
आनीयतामपरस्तिग्मतेजा:
पश्यध्वं मे वीर्यमद्य क्षितीशा:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा, "हे इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रियों! अब मैं वही कर रहा हूँ जो तुम्हें अच्छा लगता है। आज मैं इस ब्राह्मण को कुचलकर मार डालूँगा। एक और शक्तिशाली बाण लाओ और आज मेरा पराक्रम देखो।"
 
The king said— O Kshatriyas of the Ikshvaku dynasty! I am doing what pleases you now. Today I will trample this Brahmin to death. Bring another powerful arrow and see my prowess today.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)