Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.192.51: राजा ने कहा, "ब्राह्मण! तब तो चार गधे, उत्तम नस्ल के खच्चर अथवा वायु के समान वेगवान अन्य घोड़े तुम्हारी सवारी के लिए दिए जा सकते हैं। तुम इन्हीं वाहनों से यात्रा कर सकते हो। यह वाहन, जिसे तुम मांगने आए हो, केवल क्षत्रिय राजा के लिए ही उपयुक्त है। अतः तुम समझ लो कि ये छोड़े हुए घोड़े मेरे हैं, तुम्हारे नहीं हैं ॥ 51॥ | mahabharat अध्याय 3.192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजोवाच
चत्वारस्त्वां वा गर्दभा: संवहन्तु
श्रेष्ठाश्वतर्यो हरयो वातरंहा:।
तैस्त्वं याहि क्षत्रियस्यैष वाहो
ममैव वाम्यौ न तवैतौ हि विद्धि॥ ५१॥
अनुवाद
राजा ने कहा, "ब्राह्मण! तब तो चार गधे, उत्तम नस्ल के खच्चर अथवा वायु के समान वेगवान अन्य घोड़े तुम्हारी सवारी के लिए दिए जा सकते हैं। तुम इन्हीं वाहनों से यात्रा कर सकते हो। यह वाहन, जिसे तुम मांगने आए हो, केवल क्षत्रिय राजा के लिए ही उपयुक्त है। अतः तुम समझ लो कि ये छोड़े हुए घोड़े मेरे हैं, तुम्हारे नहीं हैं ॥ 51॥
The king said, "Brahmin! Then four donkeys, good breed mules or other horses as fast as the wind can be offered for your ride. You may travel in these vehicles only. This vehicle, which you have come to ask for, is fit only for a Kshatriya king. Therefore, you should understand that these left horses are mine, not yours. ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥