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mahabharat 3.192.30: अपनी प्रिय रानी के वियोग में राजा का हृदय शोक से जल रहा था। उन्होंने उपर्युक्त वचन कहने वाले मण्डुकराज से कहा -॥30॥   |   mahabharat अध्याय 3.192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.192.30 
तमेवंवादिनमिष्टजनशोकपरीतात्मा राजाथोवाच॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
अपनी प्रिय रानी के वियोग में राजा का हृदय शोक से जल रहा था। उन्होंने उपर्युक्त वचन कहने वाले मण्डुकराज से कहा -॥30॥
 
The king's heart was burning with grief at the loss of his beloved queen. He said to the Mandukaraja who had said the above words -॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)