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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.192.18 
वनमिदमुदारकं साध्वत्र रम्यतामिति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! यह वन बहुत सुन्दर है, आप इसका खूब आनंद लें॥18॥
 
Maharaja! This forest is very beautiful, you should enjoy it well.'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)