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mahabharat 3.192.1: वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! तदनन्तर पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर ने मुनिवर मार्कण्डेय से कहा- 'ब्रह्मन्! पुनः ब्राह्मणों की महिमा का वर्णन कीजिये। 1॥   |   mahabharat अध्याय 3.192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 192: इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित् का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.192.1 
वैशम्पायन उवाच
भूय एव ब्राह्मणमहाभाग्यं वक्तुमर्हसीत्यब्रवीत् पाण्डवेयो मार्कण्डेयम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! तदनन्तर पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर ने मुनिवर मार्कण्डेय से कहा- 'ब्रह्मन्! पुनः ब्राह्मणों की महिमा का वर्णन कीजिये। 1॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Thereafter Pandunandan Yudhishthir said to Munivar Markandeya – 'Brahman! Again, describe the glory of Brahmins. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)