श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  3.190.96 
स चेमं संकुलं लोकं प्रसादमुपनेष्यति।
उत्थितो ब्राह्मणो दीप्त: क्षयान्तकृदुदारधी:॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
वह उदारचित्त तेजस्वी ब्राह्मण इस दुःख से भरे हुए संसार को आनन्द प्रदान करेगा। वह कलियुग का अन्त करने के लिए ही प्रकट होगा॥ 96॥
 
That generous-minded, radiant Brahmin will bring joy to this world filled with sorrow. He will appear only to end the Kali Yuga.॥ 96॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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