| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन » श्लोक 93-d1h |
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| | | | श्लोक 3.190.93-d1h  | कल्की विष्णुयशा नाम द्विज: कालप्रचोदित:।
उत्पत्स्यते महावीर्यो महाबुद्धिपराक्रम:॥ ९३॥
सम्भूत: सम्भलग्रामे ब्राह्मणावसथे शुभे।
(महात्मा वृत्तसम्पन्न: प्रजानां हितकृन्नृप।) | | | | | | अनुवाद | | राजा! युग के अंत समय में काल की प्रेरणा से सम्भल नामक ग्राम में एक शुभ ब्राह्मण के घर में एक महापराक्रमी बालक का जन्म होगा, जिसका नाम विष्णुयश कल्कि होगा। वह महापुरुष, महान् बुद्धि और पराक्रम से युक्त, गुणवान और प्रजा का हितैषी होगा। (वह बालक भगवान का कल्कि अवतार कहलाएगा)॥93॥ | | | | King! At the time of the end of the age, by the inspiration of time, in a village called Sambhal, in the auspicious house of a Brahmin, a very powerful child will be born, whose name will be Vishnuyash Kalki. He will be a great soul, endowed with great wisdom and valour, virtuous and a well wisher of the people. (That child will be called the Kalki incarnation of God)॥93॥ | | ✨ ai-generated | | |
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