श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  3.190.92 
प्रदक्षिणा ग्रहाश्चापि भविष्यन्त्यनुलोमगा:।
क्षेमं सुभिक्षमारोग्यं भविष्यति निरामयम्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
ग्रह परिभ्रमण के अभाव में अनुकूल गति का आश्रय लेकर अपने पथ पर आगे बढ़ेंगे। उस समय सभी लोग सुखी होंगे। देश में अच्छा समय आएगा। आरोग्य का प्रसार होगा। और रोग का नामोनिशान नहीं रहेगा॥ 92॥
 
The planets will move ahead on their paths taking support of favorable speed due to the absence of rotation. At that time everyone will be happy. There will be good times in the country. Health will spread. And there will be no trace of disease.॥ 92॥
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