श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  3.190.78 
षड्‍‍भिरन्यैश्च सहितो भास्कर: प्रतपिष्यति।
तुमुलाश्चापि निर्ह्रादा दिग्दाहाश्चापि सर्वश:॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
एक सूरज तो है ही, छः और उगेंगे और सातों एक साथ चमकेंगे। हर तरफ़ बिजली की भयंकर गड़गड़ाहट होगी, हर तरफ़ आग भड़केगी। 78.
 
There is already one sun, six more will rise and all seven will shine together. There will be terrible thunders of lightning everywhere, fire will blaze in all directions. 78.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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