श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  3.190.74 
एवं पर्याकुले लोके मर्यादा न भविष्यति।
न स्थास्यन्त्युपदेशे च शिष्या विप्रियकारिण:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
यदि ऐसी अराजकता उत्पन्न हो गई, तो संसार में कोई व्यवस्था नहीं रहेगी। शिष्य अपने गुरु की शिक्षा का पालन नहीं करेंगे। उल्टे, वे उनका ही अहित करेंगे ॥ 74॥
 
If such chaos is created, there will be no order left in the world. The disciples will not follow the teachings of their Guru. On the contrary, they will harm them. ॥ 74॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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