श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  3.190.7-8 
मार्कण्डेय उवाच
शृणु राजन् मया दृष्टं यत् पुरा श्रुतमेव च।
अनुभूतं च राजेन्द्र देवदेवप्रसादजम्॥ ७॥
भविष्यं सर्वलोकस्य वृत्तान्तं भरतर्षभ।
कलुषं कालमासाद्य कथ्यमानं निबोध मे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेयजी बोले - भरतश्रेष्ठ राजन! देवाधिदेव भगवान बालमुकुन्द की कृपा से मैंने पूर्वकाल में जो कुछ देखा, सुना या अनुभव किया है, वह सब घोर कलिकाल को प्राप्त होने के पश्चात् समस्त लोकों की भविष्य की कथा के विषय में तुमसे कहता हूँ, सुनो और समझो॥7-8॥
 
Markandeya said – Bharatshreshtha Rajan! By the grace of Devadhidev Lord Balmukund, I am telling you whatever I have seen, heard or experienced in the past, regarding the future story of all the worlds after attaining the worst Kalikaal, listen and understand. 7-8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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