| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन » श्लोक 68-69h |
|
| | | | श्लोक 3.190.68-69h  | भविष्यति युगे क्षीणे तद् युगान्तस्य लक्षणम्।
यदा रौद्रा धर्महीना मांसादा: पानपास्तथा॥ ६८॥
भविष्यन्ति नरा नित्यं तदा संक्षेप्स्यते युगम्। | | | | | | अनुवाद | | यह सब युग के अंत का लक्षण समझना चाहिए। जब सभी मनुष्य कायर, अधार्मिक, मांसाहारी और शराबी हो जाएँगे, तब युग का नाश हो जाएगा। | | | | All this should be considered as a sign of the end of the age. When all humans become fearful, irreligious, meat eaters and drunkards, then the era will be destroyed. | | ✨ ai-generated | | |
|
|