श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  3.190.59 
हाहाकृता द्विजाश्चैव भयार्ता वृषलार्दिता:।
त्रातारमलभन्तो वै भ्रमिष्यन्ति महीमिमाम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
शूद्रों द्वारा सताए हुए ब्राह्मण भयभीत होकर त्राहि-त्राहि करेंगे और निश्चय ही पृथ्वी पर भटकेंगे, क्योंकि उन्हें कोई रक्षक न मिलेगा ॥59॥
 
The Brahmins oppressed by the Shudras will become afraid and will cry out in distress and will certainly wander all over the earth since they will not find any protector. ॥ 59॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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