श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.190.55 
ज्ञानानि चाप्यविज्ञाय करिष्यन्ति क्रियास्तथा।
आत्मच्छन्देन वर्तन्ते युगान्ते समुपस्थिते॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
लोग कर्म का सार जाने बिना ही उसे करने में प्रवृत्त होंगे। युग के अंत में सभी मनुष्य स्वेच्छाचारी हो जाएँगे ॥55॥
 
People will be inclined to perform the action even without knowing its essence. At the end of the age all human beings will become self-willed. ॥ 55॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas