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श्लोक 3.190.55  |
ज्ञानानि चाप्यविज्ञाय करिष्यन्ति क्रियास्तथा।
आत्मच्छन्देन वर्तन्ते युगान्ते समुपस्थिते॥ ५५॥ |
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| अनुवाद |
| लोग कर्म का सार जाने बिना ही उसे करने में प्रवृत्त होंगे। युग के अंत में सभी मनुष्य स्वेच्छाचारी हो जाएँगे ॥55॥ |
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| People will be inclined to perform the action even without knowing its essence. At the end of the age all human beings will become self-willed. ॥ 55॥ |
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