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श्लोक 3.190.47  |
न कश्चित् कस्यचिच्छ्रोता न कश्चित् कस्यचिद् गुरु:।
तमोग्रस्तस्तदा लोको भविष्यति जनाधिप॥ ४७॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! उस समय न तो कोई किसी का उपदेश सुनेगा और न कोई किसी का गुरु बनेगा। सारा संसार अज्ञान के अंधकार में डूबा रहेगा॥ 47॥ |
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| O King! At that time no one will listen to anyone's teachings and no one will be anyone's Guru. The whole world will be covered in the darkness of ignorance. ॥ 47॥ |
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