श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.190.47 
न कश्चित् कस्यचिच्छ्रोता न कश्चित् कस्यचिद् गुरु:।
तमोग्रस्तस्तदा लोको भविष्यति जनाधिप॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उस समय न तो कोई किसी का उपदेश सुनेगा और न कोई किसी का गुरु बनेगा। सारा संसार अज्ञान के अंधकार में डूबा रहेगा॥ 47॥
 
O King! At that time no one will listen to anyone's teachings and no one will be anyone's Guru. The whole world will be covered in the darkness of ignorance. ॥ 47॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas