श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.190.46 
म्लेच्छभूतं जगत् सर्वं भविष्यति युधिष्ठिर।
न श्राद्धैस्तर्पयिष्यन्ति दैवतानीह मानवा:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! उस समय सारा जगत म्लेच्छ हो जाएगा। मनुष्य श्राद्ध और यज्ञ करके पितरों और देवताओं को तृप्त नहीं कर पाएंगे।
 
Yudhishthira! At that time the whole world will become mlechha. Human beings will not satisfy the ancestors and gods by performing shraadh and yagna. 46.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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