श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.190.45 
स्वैराचाराश्च पुरुषा योषितश्च विशाम्पते।
अन्योन्यं न सहिष्यन्ति युगान्ते पर्युपस्थिते॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब युग का अन्त आएगा, तब स्त्री-पुरुष स्वेच्छाचारी हो जाएँगे और एक-दूसरे के कर्म और विचार सहन नहीं करेंगे ॥ 45॥
 
Maharaj! When the end of the age comes, men and women will become self-willed and will not tolerate each other's actions and thoughts. ॥ 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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