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श्लोक 3.190.45  |
स्वैराचाराश्च पुरुषा योषितश्च विशाम्पते।
अन्योन्यं न सहिष्यन्ति युगान्ते पर्युपस्थिते॥ ४५॥ |
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| अनुवाद |
| महाराज! जब युग का अन्त आएगा, तब स्त्री-पुरुष स्वेच्छाचारी हो जाएँगे और एक-दूसरे के कर्म और विचार सहन नहीं करेंगे ॥ 45॥ |
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| Maharaj! When the end of the age comes, men and women will become self-willed and will not tolerate each other's actions and thoughts. ॥ 45॥ |
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