श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.190.42 
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या न शिष्यन्ति जनाधिप।
एकवर्णस्तदा लोको भविष्यति युगक्षये॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों का नाम भी न रहेगा। अन्त समय में सारा जगत एक वर्ण, एक जाति हो जाएगा। 42॥
 
Nareshwar! Even the names of Brahmins, Kshatriyas and Vaishyas will not remain. In the end times the whole world will become one varna, one caste. 42॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas