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श्लोक 3.190.37  |
राजानश्चाप्यसंतुष्टा: परार्थान् मूढचेतस:।
सर्वोपायैर्हरिष्यन्ति युगान्ते पर्युपस्थिते॥ ३७॥ |
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| अनुवाद |
| कलियुग के अन्त में असंतुष्ट और मूर्ख राजा भी हर प्रकार से दूसरों का धन हड़प लेंगे ॥37॥ |
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| At the end of the Kali-yuga, dissatisfied and foolish kings will also usurp the wealth of others by all means. ॥ 37॥ |
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