श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.190.37 
राजानश्चाप्यसंतुष्टा: परार्थान् मूढचेतस:।
सर्वोपायैर्हरिष्यन्ति युगान्ते पर्युपस्थिते॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
कलियुग के अन्त में असंतुष्ट और मूर्ख राजा भी हर प्रकार से दूसरों का धन हड़प लेंगे ॥37॥
 
At the end of the Kali-yuga, dissatisfied and foolish kings will also usurp the wealth of others by all means. ॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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