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श्लोक 3.190.30  |
प्रायश: कृपणानां हि तथाबन्धुमतामपि।
विधवानां च वित्तानि हरिष्यन्तीह मानवा:॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| लोग प्रायः गरीबों, असहायों और यहां तक कि विधवाओं का धन हड़प लेते हैं। |
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| People will often usurp the wealth of the poor, the helpless and even widows. 30. |
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