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श्लोक 3.190.3  |
अस्मिन् कलियुगे त्वस्ति पुन: कौतूहलं मम।
समाकुलेषु धर्मेषु किं नु शेषं भविष्यति॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| अब मैं इस कलियुग के विषय में और अधिक सुनने के लिए उत्सुक हूँ। जब सब धर्म नष्ट हो जाएँगे, तब क्या शेष रह जाएगा?॥3॥ |
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| Now I am curious to hear more about this Kali Yuga. When all religions will be destroyed, what will be left at that time?॥ 3॥ |
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