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mahabharat 3.190.24: जो मनुष्य सदैव व्रत का पालन करते हैं (परणा त्यागकर), वे भी लोभ के कारण देवयज्ञ और श्राद्ध के समय एक-दूसरे के यहाँ भोजन करते हैं॥24॥   |   mahabharat अध्याय 3.190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.190.24 
श्राद्धे दैवे च पुरुषा येऽपि नित्यं धृतव्रता:।
तेऽपि लोभसमायुक्ता भोक्ष्यन्तीह परस्परम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सदैव व्रत का पालन करते हैं (परणा त्यागकर), वे भी लोभ के कारण देवयज्ञ और श्राद्ध के समय एक-दूसरे के यहाँ भोजन करते हैं॥24॥
 
Those who always observe the fast (by renouncing Paranna), they will also, out of greed, eat at each other's places during Devyagya and Shraddha. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)